पांच राज्य हाथ से निकल जाने के बाद अब दिल्ली व बिहार में क्या होगा भाजपा का

ABC NEWS:झारखंड चुनाव की मतगणना सोमवार को जैसे-जैसे अपनी अंतिम चरण में पहुंच रही थी, भारतीय जनता पार्टी के हाथ से एक और महत्वपूर्ण राज्य खिसकता जा रहा था. झारखंड में हार के साथ ही बीजेपी के हाथों से 1 साल में 5वां राज्य निकल गया है. इस एक साल के भीतर बीजेपी को मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सत्ता से भी हाथ गंवाना पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी ने बीते एक साल में एक भी बड़े राज्य में जीत हासिल नहीं की है.

झारखंड में 2014 में पहली बार बीजेपी ने 37 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. सहयोगी आजसू के साथ उसके पास आसानी से बहुमत का जादुई आंकड़ा आ गया था. अब चुनावी हार के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस्तीफा देते हुए हार का ठीकरा अपने सिर लिया है. उन्होंने कहा है ये पार्टी की हार नहीं, मेरी हार है.

साल 2013 में भारतीय जनता पार्टी को इस राज्य में प्रचंड जीत हासिल हुई थी. वसुंधरा राजे की अगुवाई पार्टी ने 173 सीटें हासिल कर रिकॉर्ड कायम किया था. ये राज्य में पार्टी का ऐतिहासिक प्रदर्शन था, लेकिन 2018 दिसंबर में जब राजस्थान के चुनाव हुए बीजेपी राज्य की सत्ता हाथ धोना पड़ा. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक राज्य में बीजेपी की हार के पीछे वसुंधरा सरकार का अक्खड़पना था. वसुंधरा के बाद अशोक गहलोत राज्य के मुख्यमंत्री बने.

मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के गढ़ के रूप में पहचाना जाता है. राज्य में करीब 13 सालों तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान के शिवराज सिंह चौहान ने भी पहचान एक सौम्य नेता के रूप में विकसित की. और शायद यही कारण है कि 15 सालों के शासन के बावजूद भी बीजेपी को सत्ता से हटाने में कांग्रेस को बहुत मशक्क्त करनी पड़ी. चुनावी काउंटिंग के आखिरी क्षणों तक ये बता पाना मुश्किल लग रहा था कि राज्य में सरकार कौन बनाएगा. आखिर में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने.

छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजों को हाल के सालों का सबसे बड़ा उलटफेर भी माना जाता है. चुनाव पूर्व आए ज्यादातर एक्जिट पोल में बताया गया था कि राज्य में बीजेपी सत्ता में एक बार फिर वापसी करने जा रही है. पार्टी के पास सीएम रमन सिंह के रूप में एक सौम्य चेहरा था और सभी को भरोसा था कि वो एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन चुनावी नतीजों में 90 सदस्यीय विधानसभा बीजेपी को महज 18 सीटों से संतोष करना पड़ा. कांग्रेस पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की. जमीनी नेता भूपेश बघेल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया.

हाल में सम्पन्न हुए महाराष्ट्र के चुनाव में भले ही भारतीय जनता पार्टी के हाथों से सरकार फिसल गई हो लेकिन शिवसेना के साथ हुए चुनाव पूर्व गठबंधन में उसने बहुमत हासिल किया था. लेकिन चुनाव के बाद शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर अड़ गई और बीजेपी की तरफ से इसके लिए पूरी मनाही कर दी गई थी. दूसरी तरफ एनसीपी, कांग्रेस ने शिवसेना को मुख्यमंत्री पद दे दिया और इस तरह से एक और महत्वपूर्ण राज्य बीजेपी के हाथों से खिसक गया.

अब भारतीय जनता पार्टी के सामने दो और महत्वपूर्ण राज्यों में चुनावों की अग्निपरीक्षा है. पहले दिल्ली और फिर बिहार. दिल्ली में 2015 आम आदमी पार्टी ने तकरीबन पूरे विपक्ष का सफाया कर दिया था. 70 सदस्यीय विधानसभा में आप ने 67 सीटें जीतकर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों (बीजेपी-कांग्रेस) के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी थी. कांग्रेस का तो खाता तक नहीं खुला था. अरविंद केजरीवाल लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं. उनके सामने बीजेपी किस स्टैटजी के साथ आती है ये देखना दिलचस्प होगा.
बिहार में चुनावी गणित पिछली बार से बिल्कुल उलट हो चुका है. बीते चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए दो पुराने प्रतिद्वंद्वी आरजेडी और जेडीयू एक हो गए थे. इस गठबंधन ने बीजेपी को बड़ी मात दी थी. लेकिन फिर बाद में नीतीश कुमार बीजेपी के साथ आ गए और इस बार का चुनाव उन्हीं के नेतृ्त्व में लड़ा जाएगा. ऐसे में सहयोगी पार्टी जेडीयू के साथ तालमेल बिठाकर राज्य की सत्ता में बने रहना बीजेपी की प्राथमिकता में होगा. हालांकि पिछले कुछ समय में पार्टी के संबंध सहयोगी पार्टियों के साथ तीखे हुए हैं. महाराष्ट्र में शिवसेना सबसे प्रमुख उदाहण है.संदर्भ पढ़ेंपढ़ें पूरी कहानी UC News परदोस्तों संग शेयर करें

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Author: admin

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